अयोध्याउत्तर प्रदेश

राम मंदिर में अब बदलेगा पूरा सिस्टम! CEO-महामंत्री की ताकत अलग, जानें किसके पास क्या अधिकार

राम मंदिर ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO बनाया। CEO संचालन संभालेंगे, जबकि महामंत्री दिशा-निर्देशन और निगरानी करेंगे। ट्रस्ट में तीन नए सदस्य जुड़े।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ram Mandir Trust: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और व्यवस्थाओं के विस्तार के बीच ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO बनाया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब महामंत्री का पद पहले से मौजूद है, तो CEO की जरूरत क्यों पड़ी और दोनों की जिम्मेदारियां कितनी अलग होंगी?

CEO संभालेंगे रोजमर्रा की कमान

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा की भूमिका मंदिर और ट्रस्ट की कार्यकारी व्यवस्था को मजबूत करने की होगी। वह ट्रस्ट के वैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज की निगरानी करेंगे और महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे। CEO की जिम्मेदारी केवल मंदिर के दैनिक संचालन तक सीमित नहीं होगी। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय, काम करने की प्रक्रिया तैयार करना, प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना और अलग-अलग विभागों के काम को व्यवस्थित करना भी उनके दायरे में रहेगा।

पूजा से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक जिम्मेदारी

मंदिर में पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजन, त्योहार और अन्य कार्यक्रम तय परंपराओं के अनुसार सुचारू रूप से हों, यह सुनिश्चित करना भी CEO की जिम्मेदारी होगी। वह धार्मिक परंपराओं का स्वतंत्र रूप से निर्धारण नहीं करेंगे, बल्कि ट्रस्ट के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू कराने का काम करेंगे। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, परिसर की व्यवस्थाओं तथा विशेष अतिथियों और संतों के आगमन पर जरूरी इंतजामों में भी CEO की भूमिका अहम होगी।

सुरक्षा पर भी रहेगी नजर

राम मंदिर की सुरक्षा को लेकर CEO को स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करना होगा। जितेंद्र मिश्रा के पास भारतीय वायुसेना में वरिष्ठ कमान और प्रशासन का लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में उनकी पृष्ठभूमि को इस जिम्मेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पैसे और संपत्ति का भी हिसाब

ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता, रिकॉर्ड का रखरखाव और संपत्तियों के उचित प्रबंधन की जिम्मेदारी भी CEO के पास होगी। ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुरूप योजनाएं तैयार करना और उन्हें जमीन पर लागू कराना भी उनकी भूमिका का हिस्सा होगा।

फिर महामंत्री क्या करेंगे?

CEO की नियुक्ति के बाद महामंत्री का पद खत्म नहीं हुआ है। दोनों की जिम्मेदारियां अलग-अलग रहेंगी। महामंत्री ट्रस्ट की व्यापक प्रशासनिक दिशा, महत्वपूर्ण निर्णयों और निगरानी में भूमिका निभाएंगे, जबकि CEO उन फैसलों को लागू कराने वाली कार्यकारी व्यवस्था संभालेंगे। यानी आसान भाषा में समझें तो महामंत्री दिशा और मार्गदर्शन देंगे, जबकि CEO उस दिशा को जमीन पर उतारने का काम करेंगे। CEO सीधे महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और ट्रस्ट बोर्ड के मार्गदर्शन में काम करेंगे।

CEO के लिए तय थीं कड़ी शर्तें

ट्रस्ट ने CEO पद के लिए स्नातक डिग्री, 50 से 70 वर्ष की आयु और बड़े संगठन में कम से कम 20 साल के प्रबंधन अनुभव जैसी शर्तें रखी थीं। प्रशासन, वित्त, HR, IT, सुरक्षा, जनसंपर्क और कानूनी मामलों में समन्वय का अनुभव रखने वालों को योग्य माना गया। मंदिर या हिंदू धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का अनुभव रखने वालों को प्राथमिकता दी गई। CEO का कार्यकाल तीन साल का होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। वहीं, महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा अब तक बिना वेतन के जिम्मेदारी संभालते रहे हैं, जबकि CEO का पद वेतनभोगी होगा।

ट्रस्ट में तीन नए चेहरे भी जुड़े

राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी अयोध्या के मदन मोहन, दिल्ली के महेश भागचंदा और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को शामिल किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद फरवरी 2020 में हुआ था। इसमें स्थायी, पदेन और आमंत्रित सदस्य शामिल हैं। केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि पदेन सदस्य हैं, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं है। महत्वपूर्ण फैसलों में अंतिम अधिकार ट्रस्ट के स्थायी सदस्यों के पास रहता है।

इस नए ढांचे के बाद राम मंदिर की व्यवस्था अब धार्मिक प्रबंधन के साथ-साथ आधुनिक प्रशासन, सुरक्षा, वित्त और श्रद्धालु सुविधाओं पर भी ज्यादा केंद्रित दिखाई देगी।

ये भी पढ़ें: राम मंदिर के पहले CEO पर बड़ा अपडेट! सर्च कमेटी ने सौंप दी रिपोर्ट, अब 2 सितंबर को होगा अंतिम फैसला

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »